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रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में हर साल लगभग दस लाख स्टमक (पेट) के कैंसर के मामले दर्ज किए जाते हैं। धूम्रपान और हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण से स्टमक (पेट) के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
स्टमक (पेट) का कैंसर, जिसे गैस्ट्रिक कैंसर के रूप में भी जाना जाता है, एक प्रकार का कैंसर है जो स्टमक (पेट) की अंदरूनी परत में बनता है। रिपोर्ट बताती है कि दुनिया भर में हर साल लगभग दस लाख स्टमक (पेट) के कैंसर के मामले दर्ज किए जाते हैं। यह दक्षिण पूर्व एशियाई क्षेत्र में अधिक आम है।
धूम्रपान, क्रोनिक हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण और नमकीन और मसालेदार भोजन का सेवन कुछ ऐसे कारक हैं जो स्टमक (पेट) के कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाते हैं।
जिस प्रकार के ऊतक से वे उत्पन्न होते हैं, उसके आधार पर स्टमक (पेट) के कैंसर को निम्न प्रकारों में वर्गीकृत किया जाता है :
लगभग 90 - 95% स्टमक (पेट) के कैंसर एडेनोकार्सिनोमा पाए जाते हैं। ये स्टमक (पेट) की सबसे भीतरी परत में शुरू होते हैं जिसे म्यूकोसा कहा जाता है।
ये ट्यूमर स्टमक (पेट) की दीवार के काजल की इन्टर्स्टिशल सेल्स (बीच वाली कोशिकाओं) में बनते हैं और इनकी घटनाएं दुर्लभ होती हैं।
न्यूरोएंडोक्राइन ट्यूमर धीमी गति से बढ़ने वाले ट्यूमर होते हैं जो न्यूरोएंडोक्राइन सेल्स (कोशिकाओं) से उत्पन्न होते हैं। ये धीमी गति से बढ़ने वाले ट्यूमर होते हैं और शायद ही कभी अन्य अंगों में फैलते हैं।
लिम्फोमास स्टमक (पेट) के कैंसर का एक अन्य प्रकार है जिसमें लिम्फैटिक सिस्टम (लसीका प्रणाली) शामिल होती है।
स्टमक (पेट) के अन्य दुर्लभ कैंसर में गैस्ट्रिक सारकोमा, स्मॉल सेल कार्सिनोमा, स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा और लेयोमायोसार्कोमा शामिल हैं।
रोग के प्रारंभिक चरण में संकेत या लक्षण बहुत अस्पष्ट होते हैं। हालाँकि, जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, निम्नलिखित लक्षण देखे जाते हैं :
उपरोक्त लक्षण पेप्टिक अल्सर का भी संकेत दे सकते हैं, जिसके लिए तत्काल चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है क्योंकि दीर्घकालिक अल्सर स्टमक (पेट) के कैंसर के जोखिम कारकों में से एक हैं। जैसे-जैसे स्टमक (पेट) का कैंसर बढ़ता है, निम्नलिखित लक्षण देखे जाते हैं :
स्टमक (पेट) के कैंसर का सटीक कारण पता नहीं है। हालांकि, स्टमक (पेट) के कैंसर से जुड़े कुछ जोखिम कारक हैं :
एच. पाइलोरी एक जीवाणु है जो स्टमक (पेट) की परत को संक्रमित करता है और दीर्घकालिक सूजन और अल्सर का कारण बनता है। यदि इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो यह स्टमक (पेट) के कैंसर का कारण बन सकता है।
महिलाओं की तुलना में पुरुषों में स्टमक (पेट) के कैंसर का जोखिम अधिक होता है।
उम्र के साथ स्टमक (पेट) का कैंसर विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।
इनहेरिटेड कैंसर सिंड्रोम, जैसे हेरेडिटरी डिफ्यूज़ गैस्ट्रिक कैंसर (एचडीजीसी), लिंच सिंड्रोम, फैमिलियल एडेनोमेटस पॉलीपोसिस, ली - फ्राउमेनी सिंड्रोम, गैस्ट्रिक एडेनोमा और स्टमक (पेट) के प्रोक्सिमल पॉलीपोसिस और प्यूट्ज़ - जेगर्स सिंड्रोम स्टमक (पेट) के कैंसर के विकास के जोखिम को बढ़ाते हैं।
जीवनशैली की खराब आदतें, जैसे धूम्रपान, शराब का सेवन, नमकीन, स्मोक्ड या नाइट्रेट - संरक्षित खाद्य पदार्थों का सेवन, फलों और सब्जियों का कम सेवन आदि, स्टमक (पेट) के कैंसर के विकास के बढ़ते जोखिम में योगदान करते हैं।
हिस्पैनिक अमेरिकियों, अफ्रीकी अमेरिकियों, मूल अमेरिकियों और एशियाई (दक्षिण पूर्व एशिया) नस्ल की आबादी के बीच स्टमक (पेट) के कैंसर का खतरा अधिक होता है।
जिन लोगों का स्टमक (पेट) के कैंसर का सकारात्मक पारिवारिक इतिहास होता है, उन लोगों में स्टमक (पेट) के कैंसर का जोखिम अधिक होता है।
ब्लड ग्रुप 'ए' वाले लोगों में स्टमक (पेट) के कैंसर का खतरा अधिक होता है।
निकेल रिफाइनिंग, कोयला खनन, रबर और लकड़ी प्रसंस्करण जैसे व्यवसायों में काम करने वाले लोगों में स्टमक (पेट) के कैंसर के विकास का जोखिम अधिक होता है। अभ्रक के संपर्क में आना भी एक जोखिम कारक माना जाता है।
कुछ स्वास्थ्य स्थितियां, जैसे घातक एनिमिया (खून की कमी), दीर्घकालिक गैस्ट्राइटिस, इंटेस्टाइनल मेटाप्लासिया, गैस्ट्रिक पॉलीप्स और अतीत में की हुई किसी भी प्रकार की स्टमक (पेट) की सर्जरी, स्टमक (पेट) के कैंसर के बढ़ते जोखिम से जुड़ी हैं।
स्टमक (पेट) के कैंसर का पता लगाने और निदान करने के लिए कई परीक्षण विधियाँ उपलब्ध हैं|
किसी भी असामान्यता की जांच करने के लिए शारीरिक परीक्षण और रक्त परीक्षण किए जाते हैं, और यदि स्टमक (पेट) के कैंसर का संदेह होता है, तो निश्चित निदान प्राप्त करने के लिए निम्नलिखित परीक्षणों की सिफारिश की जा सकती है :
एंडोस्कोपी के दौरान, डॉक्टर एक पतली, ट्यूब जिस पर एक प्रकाश का स्त्रोत और कैमेरा फिट किया होता हैं, उसे इसोफैगस (अन्ननलिका), स्टमक (पेट) और छोटी आंत के ऊपरी हिस्से के क्षेत्रों की जांच करने के लिए गले के माध्यम से अंदर डाला जाता है।
बायोप्सी में संदिग्ध क्षेत्र से ऊतक के एक छोटे से हिस्से को निकालना और माइक्रोस्कोप के तहत इसकी जांच करना शामिल है। बायोप्सी ट्यूमर की प्रकृति, उसके ग्रेड और ट्यूमर के चरण आदि के बारें में महत्वपूर्ण जानकारी के साथ एक निश्चित निदान पर पहुंचने में मदद करती है।
पेट / सीटी स्कैन, एमआरआई स्कैन, बेरियम स्वालो, एक्स-रे आदि जैसे इमेजिंग टेस्ट यह निर्धारित करने में मदद करते हैं कि कैंसर आसपास के अंगों में फैल गया है या नहीं। परीक्षणों के परिणाम उपचार योजना में भी मदद करते हैं।
स्टमक (पेट) का कैंसर उन कैंसर में से एक है जिनका उन्नत चरणों में निदान किया जाता है। इसलिए, दो सप्ताह से अधिक समय तक बने रहने वाले किसी भी लक्षण को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। आमतौर पर स्टमक (पेट) के कैंसर का इलाज सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) से किया जाता है।
सर्जरी के दौरान, ट्यूमर और उसके आसपास के स्वस्थ ऊतकों के एक छोटे से हिस्से को निकाल दिया जाता है। स्थान और चरण के आधार पर, आंत, पैंक्रिआज़ (अग्न्याशय) या अन्य प्रभावित अंगों के उस हिस्से को भी निकाल दिया जा सकता है।
यह एक मिनिमली इनवेसिव (कम से कम चिरफाड वाली) सर्जरी है जहां एंडोस्कोपी के दौरान एक इलेक्ट्रिकल वायर लूप का उपयोग करके ट्यूमर को निकाल दिया जाता है। यह उपचार का तरीका प्रभावी है और शुरुआती चरण के स्टमक (पेट) के कैंसर जिसमें ट्यूमर दीवार में गहराई तक नहीं बढ़ा होता है उसके उपचार के लिए चुना जाता है ।
यह प्रक्रिया म्यूकोसल रिसेक्शन के समान होती है, लेकिन इसका उपयोग म्यूकोसा के एक बड़े क्षेत्र को एक टुकड़े में विभाजित करने के लिए किया जाता है।
यह प्रक्रिया कैंसर के करीब स्थित लिम्फ नोड्स को निकाल देती है। यदि कैंसर फैलने की संभावना होती है या पहले से ही पास के लिम्फ नोड्स में कैंसर फैल गया है तो रेट्रोपेरिटोनियल लिम्फ नोड डिसेक्शन की सिफारिश की जा सकती है। इस प्रक्रिया के दौरान पेट में एक चीरा लगाया जाता है और लिम्फ नोड्स को सावधानी से निकाल दिया जाता है।
पार्शल गैस्ट्रेक्टोमी में स्टमक (पेट) के उस हिस्से को निकाल दिया जाता है जिस हिस्से में ट्यूमर का विकास देखा जाता है। यदि स्टमक (पेट) के ऊपरी हिस्से (प्रोक्सिमल गैस्ट्रेक्टोमी) और स्टमक (पेट) के निचले हिस्से (डिस्टल गैस्ट्रेक्टोमी) में ट्यूमर का विकास देखा जाता है तो इस प्रक्रिया की सिफारिश की जा सकती है । यदि कैंसर स्ल्पिन (स्प्लिहा) और आसपास के अन्य अंगों में फैल गया है, तो उन्हें भी निकाल दिया जाता है।
टोटल गैस्ट्रेक्टोमी के दौरान, कैंसर से प्रभावित अन्य अंगों के साथ-साथ पूरे स्टमक (पेट) को निकाल दिया जाता है। बाद में, इसोफैगस (अन्ननलिका) को सीधे छोटी आंत से जोडा जाता है। इस प्रक्रिया से गुजरे हुए मरीज़ कम मात्रा में ही खा सकते हैं।
उपशामक देखभाल के एक भाग के रूप में भी सर्जरी की जाती है। उपशामक सर्जरी का उद्देश्य कैंसर को नियंत्रित करना और दर्द जैसे लक्षणों को कम करना होता है।
ट्यूमर के आकार को कम करने के लिए सर्जरी से पहले या सर्जरी के बाद बची हुई कैंसर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने के लिए कीमोथेरेपी दी जा सकती है। उन्नत चरण के कैंसर में, उपशामक देखभाल के एक भाग के रूप में कीमोथेरेपी उपचार की मुख्य पंक्ति हो सकती है। कीमोथेरेपी ट्यूमर के आकार को कम करने, दर्द और अन्य लक्षणों को कम करने और मरीज़ों के जीवनकाल को बढ़ाने में मदद करती है।
यह उपचार ट्यूमर सेल्स (कोशिकाओं) को नष्ट करने और उनके विकास को रोकने के लिए हाई – एनर्जी रेडिएशन बीम (उच्च-ऊर्जा विकिरण किरणों ) का उपयोग करता है। रेडिएशन थेरेपी (विकिरण चिकित्सा) अक्सर सर्जरी या कीमोथेरेपी के संयोजन में दी जाती है।
ओमेप्राज़ोल दवा प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (पीपीआई) के वर्ग से संबंधित है जिसका उपयोग अपच और एसिड रिफ्लक्स जैसी स्थितियों के इलाज के लिए किया जाता है।
यह पाया गया है कि ओमेप्राज़ोल और अन्य पीपीआई स्टमक (पेट) के कैंसर के लक्षणों को बदल सकते हैं और निदान में देरी कर सकते हैं।
हमेशा नहीं, लेकिन कुछ मामलों में स्टमक (पेट) का कैंसर वापस आता है, और इसे पुनरावर्तन कहा जाता है। रोग के चरण और मरीज़ की कुल स्वास्थ्य स्थिति के आधार पर, उपचार योजना बनाई जाती है और रोग का प्रबंधन किया जाता है।
हां, कुछ मामलों में, स्टमक (पेट) का कैंसर आनुवंशिक होता है, और एक या अधिक करीबी रिश्तेदारों को स्टमक (पेट) के कैंसर का निदान होने से आपके स्टमक (पेट) के कैंसर का खतरा बढ़ जाता है।
हेलिकोबैक्टर पाइलोरी संक्रमण की अधिक दर और नमकीन और स्मोक्ड भोजन का अधिक मात्रा में सेवन यह दो मुख्य कारक हैं जो दक्षिण पूर्व एशियाई लोगों में स्टमक (पेट) के कैंसर के बढ़ते मामलों में योगदान करते हैं।
स्टमक (पेट) के कैंसर से जुड़े कई जोखिम कारकों को रोका जा सकता है। निम्नलिखित कुछ निवारक उपाय हैं जो आपके स्टमक (पेट) के कैंसर के जोखिम को कम करने में आपकी मदद कर सकते हैं :
अपने स्टमक (पेट) के कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखना महत्वपूर्ण है।।
सब्जियों और फलों से भरपूर आहार आपके स्टमक (पेट) के कैंसर के विकास के जोखिम को कम करने में मदद करता है।
एक संतुलित आहार आपके स्टमक (पेट) के कैंसर के जोखिम को कम करता है।
अपने स्टमक (पेट) के कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए धूम्रपान छोड़ें।